हाल ही में Uber इंडिया ने अपने यूजर्स से राइड शुरू होने से पहले ही टिप देने को कहा, जिसे लेकर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने नोटिस जारी किया है। Uber जैसी बड़ी कंपनी का यह कदम चिंता का विषय है क्योंकि टिपिंग एक स्वैच्छिक और सेवा के बाद दिया जाने वाला धन्यवाद होता है, न कि कोई जबरन वसूली।
भारत में टैक्सी या ऑटो में टिप देना एक सामान्य प्रथा नहीं है, इसलिए Uber का ये दबाव, जिसमें पहले से टिप देना जरूरी बताया जाता है, उपभोक्ताओं को असहज करता है। ऐप में यूजर को तीन विकल्प के साथ यह संदेश आता है कि अगर आप पहले टिप देंगे तो आपकी गाड़ी जल्दी मिलेगी। इसका मतलब यह हुआ कि बिना टिप दिए आपको बार-बार ड्राइवर कैंसिल कर सकता है, जिससे इंतजार लंबा हो जाता है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक बार जो टिप दी गई, उसे वापस नहीं लिया जा सकता, चाहे राइड कैंसिल ही क्यों न हो। यह टिप नहीं, बल्कि ग्राहकों से जबरदस्ती वसूली है। जिसे ‘ग्राहक सेवा’ के नाम पर दबाव बनाकर थोप दिया गया है।
Uber की इस नीति ने उसके प्रति ग्राहकों का भरोसा तोड़ दिया है। जहां यह प्लेटफॉर्म पारदर्शिता और भरोसेमंद सेवा का प्रतीक था, वहीं अब यह असंतोष और अनैतिकता का उदाहरण बन गया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने भी कहा है कि इससे न केवल उपभोक्ता हितों की हानि होती है बल्कि बाजार में पारदर्शिता भी प्रभावित होती है।
इसलिए, CCPA का नोटिस मात्र एक शुरुआत होनी चाहिए। Uber को तुरंत इस दबाव वाली टिपिंग नीति को वापस लेना चाहिए। उपभोक्ता संरक्षण कोई वैकल्पिक बात नहीं है, बल्कि एक जरूरी अधिकार है।
टिप हमेशा सेवा के बाद दिया जाने वाला ‘शुक्रिया’ होता है, न कि किसी सेवा की शर्त। डिजिटल युग में ग्राहक का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है, और यही Uber को याद रखना चाहिए।
Author: This news is edited by: Abhishek Verma, (Editor, CANON TIMES)
Authentic news.

