BIS

Explore

Search

Monday, August 24, 2026, 4:59 am

Monday, August 24, 2026, 4:59 am

शैक्षणिक संस्थानों में रिश्तों की दिशा: ज़रूरत एक नई समझ की

शैक्षणिक संस्थानों में रिश्तों की दिशा: ज़रूरत एक नई समझ की
Share This Post

भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में निरंतर बदलाव आ रहा है। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) की रिपोर्टें साफ़ संकेत देती हैं कि छात्राओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अब देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवा महिलाएं और पुरुष साथ पढ़ते हैं, विचार साझा करते हैं, और स्वाभाविक रूप से उनके बीच संबंध भी बनते हैं।

🎓 रिश्तों की सच्चाई से मुंह मोड़ती संस्थाएं

हालांकि आज भी हमारे शैक्षणिक संस्थानों में, विशेष रूप से प्रशासन और फैकल्टी के बीच, यौनिकता और अंतरंग संबंधों को लेकर एक अजीब-सी चुप्पी है। संस्थान मानते हैं कि कॉलेज सिर्फ पढ़ाई का स्थान है, और कोई भी रोमांटिक या यौन संबंध “अनुचित” हैं। इस सोच के कारण छात्रों को अपनी भावनाओं, जिज्ञासाओं और संबंधों को छुपाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

CG

यह समस्या तब और गहरी हो जाती है जब संस्थान यौन उत्पीड़न के मामलों को भी केवल दंडात्मक नज़रिए से देखते हैं। कई विश्वविद्यालयों में “आंतरिक शिकायत समिति” (ICC) तो होती है, लेकिन यह शिक्षा या जागरूकता के बजाय केवल औपचारिक जांच और सज़ा तक सीमित रह जाती है।

💔 युवाओं की उलझन और सांस्कृतिक प्रभाव

जब संस्थागत मार्गदर्शन नहीं होता, तो युवा आमतौर पर फिल्में, सोशल मीडिया या अपने दोस्तों की अधूरी जानकारी से प्रेरणा लेते हैं। नतीजतन, रिश्तों में एकतरफा प्यार, पीछा करना, जबरन नियंत्रण जैसी सोच पनपती है। कई बार यह हिंसक रूप भी ले लेती है, जैसा कि हालिया कई घटनाओं में देखा गया — जहाँ युवा पुरुष अस्वीकार को बर्दाश्त नहीं कर पाए।

सामाजिक ढांचे में भी प्रेम और यौन संबंधों को लेकर खुलापन नहीं है। परिवार, समाज और कानून व्यवस्था आज भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि युवा स्वतंत्र रूप से अपने जीवनसाथी या संबंध चुन सकते हैं।

📚 दिल्ली विश्वविद्यालय का साहसिक कदम

इस निराशाजनक पृष्ठभूमि में दिल्ली विश्वविद्यालय ने एक सकारात्मक और व्यावहारिक पहल की है। उन्होंने एक नया स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम शुरू किया है: “नैविगेटिंग इंटिमेट रिलेशनशिप्स” (Navigating Intimate Relationships)

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं—जैसे प्यार, ईर्ष्या, ब्रेकअप, डिजिटल दुनिया में भावनात्मक सीमाएं—के बारे में समझाना और स्वस्थ संवाद शुरू कराना है। यह कोर्स सभी संकायों के छात्रों के लिए खुला है और एक संरचित, जजमेंट-फ्री स्पेस में विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाया जाएगा।

📉 सीमित पहुंच, व्यापक ज़रूरत

हालांकि यह कोर्स अभी केवल चुनिंदा छात्रों के लिए उपलब्ध है, लेकिन इसकी आवश्यकता बहुत व्यापक है। सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों, और अभिभावकों के लिए भी इस तरह की शिक्षा ज़रूरी है, ताकि वे भी यथार्थवादी और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण विकसित कर सकें।

🧭 निष्कर्ष: रिश्तों की समझ बनाएं, उन्हें कुचलें नहीं

आज की युवा पीढ़ी कई तरह के दबावों और भ्रमों से जूझ रही है। उन्हें रिश्तों, अस्वीकार, आत्म-सम्मान और भावनात्मक तनाव को समझने के लिए मार्गदर्शन की ज़रूरत है — न कि उपदेशों और दंड की। दिल्ली विश्वविद्यालय की यह पहल एक शुरुआत है, जिसे देशभर के अन्य संस्थानों में अपनाया जाना चाहिए।

अब समय आ गया है कि हम अपने शैक्षणिक ढांचे को केवल डिग्रियों की फैक्ट्री नहीं, बल्कि संवेदनशील और समझदार नागरिकों के निर्माण स्थल के रूप में देखें।

 


Share This Post

Leave a Comment