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Monday, February 16, 2026, 5:21 pm

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उत्तराखंड में चार माह में मिले डेढ़ लाख से अधिक यूसीसी आवेदन: मुख्यमंत्री धामी

उत्तराखंड
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्री परिषद की बैठक में उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यूसीसी लागू करने के चार माह के भीतर ही राज्य में डेढ़ लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और राज्य के 98% गांवों से भागीदारी देखी गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी को प्रभावी और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने हेतु एक समर्पित पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया गया है, जिसे 14,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटरों से जोड़ा गया है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑटो एस्केलेशन और शिकायत निवारण प्रणाली भी लागू की गई है।

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उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस ऐतिहासिक कदम में मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव में किए गए वादे के अनुसार उत्तराखंड सरकार ने UCC को पहली प्राथमिकता दी। 27 मई 2022 को जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई, जिसने प्रदेश के 13 जिलों से 2.32 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त किए।

समिति की सिफारिशों पर आधारित विधेयक को विधानसभा में पारित कर 7 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति को भेजा गया, जिसे 11 मार्च 2024 को स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके बाद, 27 जनवरी 2025 को पूरे उत्तराखंड में UCC को लागू कर दिया गया, जिससे उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने संविधान के अनुच्छेद 44 को वास्तविकता में बदला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC के माध्यम से विवाह, तलाक, और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू किया गया है। इसमें बाल विवाह, बहुविवाह, तीन तलाक, हलाला और इद्दत जैसी कुप्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से बाहर रखा गया है ताकि उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों का संरक्षण हो सके।

यूसीसी के अंतर्गत:

  • लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
  • बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार दिया गया है।
  • माता-पिता को बच्चों की संपत्ति में अधिकार मिला है, जिससे बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज में समानता, समरसता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

 


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