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Tuesday, July 16, 2024, 11:38 am

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क्या ऐसे ही बनेगा खेती करना लाभ का धंधा

CANON TIMES
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नर्मदा पुरम संभाग जो कृषि प्रधान संभाग है जिसके तीनों जिलों हरदा बैतूल एवं नर्मदा पुरम के किसान प्रचुर मात्रा में अन् का उत्पादन करते हैं और इन किसानों को संबल प्रदान करने खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए प्रदेश स्तर पर ना जाने कितने प्रकल्प मध्य प्रदेश शासन के कृषि विभाग द्वारा चलाए जाते हैं फिर भी खेती कम से कम इस संभाग में लाभ का धंधा नहीं बन पा रही है आए दिन नकली बीज नकली खाद नकली पेस्टिसाइड्स के ना जाने कितने प्रकरण प्रतिवर्ष जिलों का कृषि विभाग संग्रहित करता है लेकिन आज दिनांक तक यह विभाग ऐसी कोई नजीर प्रस्तुत नहीं कर पाया जिससे कि इस प्रकार का अवैध काम करने वाले माफियाओं में किसी प्रकार का खौफ पैदा हो सके. यह काम तीनों जिलो में बेधड़क और निरंतर जारी है कृषि विभाग की कार्यप्रणाली के कारण माफिया पूर्ण निश्चित है उसे मालूम है यदि कुछ ऊंच या नीच होती भी है तो क्या होगा वही ना जो सिलसिला वर्षों से चला रहा है एफ आई आर सेंपलिंग जांच निलंबन बहाली आदि आदि और इतिहास के गर्त में मामला. यह इतना गंभीर विषय है जो प्रदेश के किसानों की जड़ में दीमक की तरह लगा हुआ है मगर भोपाल में बैठे हुए विभाग के वरिष्ठ तम अधिकारी आज तक ऐसी कोई नजीर प्रस्तुत नहीं कर सके जो इन माफियाओं में खौफ का कारण बन सके और निरंतर किसानों को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले खेती को लाभ का धंधा बनाने मैं व्यवधान पैदा करने वाले इन अराजक तत्बो पर किसी प्रकार का अंकुश लग सके . ज्यादा नहीं तो पिछले 2 वर्षों के कार्यकलाप पर नजर डाली जाए तो नर्मदा पुरम संभाग के तीनों जिलों मैं कहीं ना कहीं नकली खाद नकली बीज नकली पेस्टिसाइड्स के अनेक प्रकरण सामने आए है लेकिन इन माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण कहें वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत कहें किसी भी प्रकरण में विभाग कोई कठोर नजीर प्रस्तुत नहीं कर सका जब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सुशासन. सुशासन. सुशासन का राग अलापते हैं तो क्यों नहीं इन माफियाओं के घर बुलडोजर से ढाहाए जाते. क्यों नहीं इस प्रकार की अराजक तत्वों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्यवाही की जाती क्यों नहीं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है यह वह अनुत्तरित प्रश्न है जिनका जवाब खेती को लाभ का धंधा बनाने वाला किसान चाहता है और यदि वास्तव में शासन अपनी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं रखता है तो उसे आज से ही खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए कोई ना कोई नजीर तो प्रस्तुत करना ही होगाl

शिव मोहन सिंह-


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