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Tuesday, August 18, 2026, 5:32 pm

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“मिथी: एक नदी नहीं, अब घोटालों की धारा बन गई है”

मिथी
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मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली मिथी नदी, जो कभी शहर के जलनिकासी का भरोसेमंद माध्यम हुआ करती थी, आज भ्रष्टाचार का जीवित प्रतीक बन गई है। 26 जुलाई 2005 की भयावह बाढ़ ने जिस नदी की सफाई और सुरक्षा की ज़रूरत पर मोहर लगाई थी, उसी नदी को घोटालों की दलदल में धकेल दिया गया है।


घोटाले की परतें: मिट्टी नहीं, भरोसा हटाया गया

मिथी नदी की सफाई के नाम पर ₹1000 करोड़ का काम दर्शाया गया, लेकिन हक़ीक़त में ₹66 करोड़ का घोटाला अब तक सामने आ चुका है — और यह बस शुरुआत हो सकती है।
जिन कंपनियों को सफाई का काम सौंपा गया, उन्होंने नकली बिल, झूठे हस्ताक्षर, और मशीनरी की फर्जी खरीद जैसे हथकंडे अपनाकर जनता की गाढ़ी कमाई को विदेशी दौरों और निजी मौजमस्ती में बदल दिया

CG

जिस कंपनी को यह ठेका मिला, उसका पता किसी और का नहीं, बल्कि अभिनेता डिनो मोरिया और उनके भाई सैंटिनो मोरिया का था। वे पूछताछ में हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ पूछताछ काफ़ी है?


मुंबई डूब रही है — और BMC आंखें मूंदे बैठी है

हर मानसून में जब पानी शहर की सड़कों पर उतर आता है, लोग घरों में कैद हो जाते हैं, जनजीवन ठप हो जाता है — तब असल में मिथी नदी की कराह सुनाई देती है।
यह घोटाला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं, बल्कि मुंबईकरों की ज़िंदगी से खिलवाड़ है। यह प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़ा करता है — क्या किसी को फर्क पड़ता है कि शहर हर साल बाढ़ की गिरफ्त में आता है?


कहां हैं BMC के ज़िम्मेदार?

इतने बड़े घोटाले में BMC के अफसरों की भूमिका के बिना कुछ भी संभव नहीं था
ठेकेदार जेल में हैं, मोरिया बंधु पर जांच जारी है, लेकिन वे अफसर अब भी पद पर जमे हैं, मानो कुछ हुआ ही न हो।

क्या जांच सिर्फ़ दिखावे के लिए है? या फिर एक बार फिर भूल जाओ नीति लागू होने वाली है?


बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स — शहर बनाम नदी

मिथी की बर्बादी केवल उसकी सफाई तक सीमित नहीं है।
बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) जैसे हाई-प्रोफाइल इलाक़े सीधे नदी के फ्लडप्लेन पर बने हैं
जब नदी के प्राकृतिक मार्ग को कंक्रीट से बंद कर दिया जाएगा, तब बाढ़ आना कोई “प्राकृतिक आपदा” नहीं, बल्कि “शहरी अपराध” कहलाना चाहिए।


निष्कर्ष:

यह घोटाला एक नदी की कहानी नहीं है — यह पूरे शहर की दुर्दशा का आइना है।
मिथी अब एक चेतावनी बन चुकी है, कि यदि शहरी नियोजन को राजनीतिक सौदेबाज़ी और ठेकेदारी की मलाई में डुबो दिया गया, तो शहर एक दिन कंक्रीट की कब्रगाह बन जाएगा।

मुंबई सिर्फ़ सपनों का शहर नहीं, नागरिकों की ज़िम्मेदारी भी है। घोटालों की इस धारा को अगर न रोका गया, तो अगली बारिश में केवल पानी नहीं, पूरा भरोसा बह जाएगा।


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