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अपात्र संचालक मंडल, बैंक को हो सकते हैं नोटिस जारी

बैंक
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चार बार के रिमाइंडर और डेढ़ माह के समय के बाद 3 सदस्यीय जांच कमेटी ने संयुक्त पंजीयक सागर को जांच प्रतिवेदन सौंपा (बैंक)

छतरपुर। सद्भाव नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक छतरपुर हमेशा से विवाद की सुर्खियां बटोरता रहा। छतरपुर का सद्भाव बैंक कोई न कोई विवाद की सुर्खियों में यह सबसे आगे मिलता है। बीते दिनों संयुक्त पंजीयक सागर ने 3 सदस्य की जांच कमेटी गठित की थी। जानकारी में बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बीते कुछ माह पहले अपनी एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें सद्भाव नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित छतरपुर के संचालक मंडल को अपात्र माना था। वर्तमान संचालक मंडल में कुल 12 सदस्य थे जिसमें से 7 सदस्य बैंक के नियमों के विपरीत अपात्र थे, फिर भी अपात्र संचालक मंडल द्वारा बैंक की सभी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था। अपात्र संचालक मंडल को लेकर बीते माह मई में एक लिखित शिकायत संयुक्त पंजीयक सागर से की थी। जिसमें संयुक्त पंजीयक सागर ने डीआर ऑफिस छतरपुर से 3 सदस्य की जांच कमेटी नियुक्त की थी। जिसमें जांच कमेटी को यह निर्देश दिए गए थे कि 15 दिवस में जांच पूर्ण कर प्रतिवेदन संयुक्त पंजीयक सागर भेजें। संयुक्त पंजीयक सागर डॉ शिवेंद्र देव पांडेय द्वारा तीन सदस्यीय जांच कमेटी को 4 बार का रिमाइंडर और डेढ़ माह का समय बीतने के बाद जांच पूर्ण कर संयुक्त पंजीयक सागर को भेजी गई है। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि जांच कमेटी ने अपात्र संचालक मंडल के तीन तिहाई सदस्यों को अपात्र माना है, इसके अलावा जांच कमेटी ने और भी कई प्रकार के जांच प्रतिवेदन में भ्रष्टाचार के खुलासे किए हैं। संयुक्त पंजीयक सागर ने बताया कि जांच कमेटी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है और आगे की कार्यवाही जल्द पूर्ण की जाएगी। अपात्र संचालक मंडल और बैंक को एक दो दिन में नोटिस जारी हो जायेगे।

अपात्र संचालक मंडल के एक तिहाई सदस्य अपात्र होने के बाद भी संचालित थी बैंक की गतिविधियां –

सद्भाव नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक छतरपुर में एक तिहाई सदस्य अपात्र होने के बाद भी अपात्र मंडल अध्यक्ष द्वारा बैंक की समस्त प्रकार की गतिविधिया को संचालित किया जा रहा था। अपात्र संचालक मंडल द्वारा बीते साल बिना अनुमोदन और आरबीआई के नियम के विपरीत आधा दर्जन फर्जी नियुक्तियां की गई थी। यह नियुक्तियां भी बैंक में अलग-अलग माह में की गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक के ऑब्जेक्शन के बाद अपात्र मंडल द्वारा की गई भर्तियों को निरस्त किया गया था। इन फर्जी नियुक्तियों को बैंक द्वारा लाखों का वेतन के रूप में दिया गया था। यह पैसा भी कहीं ना कहीं अपात्र संचालक मंडल से रिकवर किया जाएगा। अपात्र संचालक मंडल के प्रोफेशनल डायरेक्टर विनीत बाजपाई के द्वारा बैंक के गोपनीय रिकॉर्ड को हेरफेर करने के उद्देश्य से वरिष्ठ अधिकारियों को बिना सूचना और बिना सुरक्षा गार्ड के रिकॉर्ड को किसी रिश्तेदार के मकान में कुछ माह के लिए रखवाया गया था। बैंक के गोपनीय रिकॉर्ड के साथ हेराफेरी करना अपराध की श्रेणी में आता है। जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। इस गोपनीय रिकॉर्ड के साथ छेड़खानी और हेरफेर की गई थी। जिसका उल्लेख भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में है। बैंक जैसी शाखाओं को अपात्र संचालक मंडल ने प्लाट की रजिस्ट्री की तरह अपना समझ रखा था। और पल में क्या डिसीजन हो जाए, शायद बैंक को भी जानकारी नहीं रहती थी। सूत्रों ने बताया कि अपात्र संचालक मंडल अध्यक्ष महोदया के किसी अन्य सदस्य बाजपेई के द्वारा बैंक में कई प्रकार के हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। जोकि एक गंभीर जांच का विषय है। अपात्र डायरेक्टरों को पात्र कर निर्वाचन अधिकारी ने उस समय जो चुनाव संपन्न कराए उसकी भी एक उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए। ऐसे कई प्रकार के भ्रष्टाचार अपात्र संचालक मंडल द्वारा किए गए हैं। संयुक्त पंजीयक सागर द्वारा अभी भी बारीकी से जांच कराई जाए, तो भ्रष्टाचार की कई नई परतें खुल सकती हैं।

अपात्र संचालक मंडल, बैंक को हो सकते हैं नोटिस जारी

इनका कहना है –

3 सदस्यीय जांच कमेटी द्वारा जांच रिपोर्ट सबमिट कर दी गई है। जांच रिपोर्ट का परीक्षण के बाद आज कल में होंगे नोटिस जारी।

डॉ शिवेंद्र देव पांडेय
संयुक्त पंजीयक, सागर


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