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पार्टी की छवि धूमिल करने में जुटा जिला पंचायत अध्यक्ष का पुत्र

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15वें वित्त की बैठक का विरोध कर सदस्यों ने जाहिर की नारजगी (पंचायत)

जिला पंचायत के सदस्यों और अध्यक्ष के बीच नहीं थम रहा विवाद

छतरपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, हर रोज इस मामले में नई-नई बातें सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष का पुत्र अपने कारनामों के चलते पार्टी की छवि धूमिल करने में जुटा है। अगर यह विवाद जल्द ही नहीं थमा तो आने वाले चुनाव में भाजपा को इसका बुरा परिणाम देखने को मिलेगा। शुक्रवार को जिला पंचायत में आयोजित 15वें वित्त की बैठक का जिला पंचायत के सदस्यों ने विरोध करते हुए आनी नाराजगी जाहिर की है। सदस्यों ने कहा है कि उन्हें यह ही समझ में नहीं आ रहा है जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती विद्या अग्निहोत्री हैं या उनका पुत्र शशिकांत अग्निहोत्री। क्योंकि जिला पंचायत के अध्यक्ष द्वारा लिए जाने वाले सारे निर्णय तो शशिकांत के द्वारा लिए जाते हैं, तो क्या श्रीमती विद्या अग्निहोत्री नाम के लिए जिला जिला पंचायत अध्यक्ष बनी हैं।

एक महिला सदस्य के पति ने बताया कि बैठक में अध्यक्ष के पुत्र को बैठने दिया जाता है लेकिन सदस्य के पति को नहीं। अन्य सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पुत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। सदस्यों ने कहा है कि पिछली बैठक में उनसे प्रस्ताव मांगे गए थे लेकिन अब उनसे सीधे तौर पर पैसों की चर्चा की जा रही है। इतना ही नहीं बैठक का बहिष्कार करने के साथ ही सदस्यों ने अध्यक्ष की तानाशाही नहीं चलेगी के नारे भी लगाए। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में 15वें वित्त की कार्ययोजना के अनुमोदन की बैठक थी। बीते दिनों की गई बैठक मे सदस्यों से प्रस्ताव मांगे गए थे, जिसके बाद आज की बैठक में सभी के प्रस्ताव दिए गए लेकिन जैसे ही बैठक शुरू हुई उसमें प्रस्ताव की चर्चा छोड़ सदस्यो को पैसे बांटने की बात होने लगी, जिसके बाद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। इस मामले में सांसद प्रतिनिधि ने कहा है कि पहली बार ऐसी परंपरा देखी गई है, जिस कारण से बैठक का बहिष्कार किया गया है। साथ ही संबंधित विभागों में शिकायत करने की भी बात कही गई है। वहीं कुछ सदस्यों ने पक्षपात के भी आरोप लगाए हैं।

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यह है विवाद

दरअसल वित्तीय वर्ष 2022-23 में आई 15वें वित्त की राशि का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 5 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए) जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने नाम पर अनुमोदित करवा लिया है, जिसके विरोध में जिला पंचायत के सदस्यों द्वारा जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन दिया गया लेकिन अभी तक इस मामले की जांच नहीं हुई है। गुप्त सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आई है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के परिजनों द्वारा शिकायत करने वाले सदस्यों से बात कर उन्हें प्रलोभन देकर चुप कराने का प्रयास भी किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में शासन द्वारा छतरपुर जिला पंचायत को 5,45,20,000 ( पांच करोड़ पैंतालीस लाख, बीस हजार) रुपए जिले के समस्त वार्डों में विकास कार्यों हेतु स्वीकृत किए गए थे। इससे पहले हुई बैठक में सभी सदस्यों ने अपने-अपने वार्डों के विकास कार्यों की सूची भी सौंप थी। इन्हीं सूचियों के अनुरूप सभी सदस्यों को पैसा आबंटित किया जाना था लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष और सीईओ ने मिलीभगत कर शासन से मिली संपूर्ण राशि में से अध्यक्ष के गांव और उनके वार्ड के लिए सीधे 5 करोड़ 30 लाख 20 हजार रुपए अनुमोदित कर लिए। शेष राशि गुलगंज और सरवई वार्ड को अनुमोदित कर दी गई। इसके अलावा जिला पंचायत के अन्य किसी भी वार्ड को राशि नही दी गई जिससे जिला पंचायत सदस्यों में नाराजगी है। लगभग 1 दर्जन से अधिक जिला पंचायत सदस्य इसकी शिकायत कर चुके हैं। जिला पंचायत सदस्यों ने 17 अप्रैल को सीईओ जिला पंचायत को शिकायती आवेदन सौंपा था लेकिन कोई कार्यवाही नहीं होने पर 2 जून 2023 को मुख्यमंत्री के नाम शिकायती आवेदन दिया गया। शिकायत करने वाले सदस्यों में देवीदयाल अहिरवार, कामता प्रसाद अहिरवार, श्रीमति पार्वती राजपूत, श्रीमति सविता पटेल, श्रीमति अभिलाषा अहिरवार, रविन्द्र कुमार पटेल, श्रीमति प्रीति यादव, श्रीमति कमलेश सिंह यादव, अशोक पटेल, श्रीमति माना पाल, श्रीमति ममता कुशवाहा, शशिकांत शुक्ला, श्रीमति सविता पटेल, श्रीमति खेमाबाई अहिरवार शामिल हैं।

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इनका कहना है

2 दिसंबर को जो कार्य योजना की बैठक हुई थी उसमें पूरे सदस्यों से हस्ताक्षर करवाये गये थे लेकिन वह पढ़ नहीं पाए थे। आज जो बैठक हुई है उसमें वह भी चर्चा हुई है। पुराने सीईओ अप्रूवल करके गए थे, उसमें सुधार नहीं हो सकता है। आगे जो कार्य होंगे सभी पंचायतों को राशि दी जाएगी।

प्रद्युम्न सिंह लोधी, अध्यक्ष नागरिक आपूर्ति निगम एवं विधायक बड़ामलहरा


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