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सनातन के अपमान पर खामोशी-हमास से जुड़ने की गर्मजोशी- रविशंकर प्रसाद

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भाजपा ने दिया स्थायी, प्रमाणिक और जनउपयोगी शासन 

स्थायित्व, सुशासन और राष्ट्रवाद के लिए भाजपा को वोट दें

वरिष्ठ नेता ने दी चुनौती-हिम्मत है तो राम मंदिर का विरोध करे कांग्रेस

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने देश की राजनीति को दिया ’कुर्ता फाड़’ शब्द

तीन-तीन बैठकों के बाद भी एकमत नहीं हो पा रहे अवसरवादी इंडी गठबंधन के लोग

*- रविशंकर प्रसाद*

ग्वालियर, दिनांक 01/11/2023। 2003 से पहले मध्यप्रदेश की क्या स्थिति थी, हम सभी ने देखा है। भाजपा की सरकार ने एक बीमारू प्रदेश को विकसित राज्य बनाया। सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं तो दी ही हैं, यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, आईटी और इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में भी बहुत काम हुआ है। मध्यप्रदेश से विदेशों को होने वाला एक्सपोर्ट बढ़ा है। यह सब इसलिए हो सका है, क्योंकि यहां स्थायित्व है। भाजपा ने मध्यप्रदेश को स्थायी, प्रमाणिक और जनउपयोगी शासन दिया है। आने वाले चुनाव में आप स्थायित्व, सुशासन और राष्ट्रवाद के लिए भाजपा को समर्थन दें। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद श्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को ग्वालियर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।

*अवसरवादी है इंडी गठबंधन*

पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आजकल इंडी गठबंधन कहां है, कुछ पता नहीं चलता। मीडिया की खबरों से यह जरूरत पता चलता है कि गठबंधन के नेता आपस में लड़ रहे हैं। राज्यों के चुनाव में उनमें इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि किसको कितनी सीटें मिलेंगी और मुख्यमंत्री कौन होगा? श्री प्रसाद ने कहा कि जब गठबंधन अवसरवादी हो, तो ऐसी ही चीजें सामने आती हैं। तीन-तीन बैठकें होने के बाद भी इसके नेता एकमत नहीं हो पा रहे हैं।

*कांग्रेस ने राजनीति को दिया कुर्ता फाड़ शब्द*

श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बिहार अक्सर राजनीति को नये-नये शब्द देने के लिए मशहूर है। लेकिन इस बार बिहार को पीछे छोड़कर मध्यप्रदेश ने राजनीति को एक नया शब्द दिया है ’कुर्ता फाड़’ राजनीति। समझ में नहीं आता कि इसके लिए कांग्रेस पार्टी को बधाई दूं, उसका अभिनंदन करूं या इस पर दुख जताऊं। दो बड़े नेता, जिनमें से एक मुख्यमंत्री पद का दावेदार है और दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री है। इनमें से मुख्यमंत्री पद के दावेदार पूर्व मुख्यमंत्री के लिए कहते हैं कि इसके कपड़े फाड़ो। श्री प्रसाद ने कहा कि इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी में अंदर खाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ये कांग्रेस के नेताओं के राजनीतिक स्वार्थ का टकराव है। अभी पता चला है कि इन दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है। पता नहीं वहां रिश्ते बनते हैं या तकरार और बढ़ेगी।

*हिम्मत है तो राम मंदिर का विरोध करे कांग्रेस*

श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में मैं रामलला का वकील रहा हूं। यह हम सभी के लिए बड़े गर्व की बात है कि 500 वर्षों की गुलामी के बाद अब संवैधानिक और न्यायिक मर्यादा का पालन करते हुए रामलला का मंदिर बन रहा है। 22 जनवरी को इसका उद्घाटन है। लेकिन कांग्रेस को इससे समस्या हो रही है। समझ में नहीं आता कि कांग्रेस को राम मंदिर से क्या परेशानी है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राम मंदिर विवाद के समाधान में हमेशा रोड़े अटकाने के प्रयास किए हैं। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के वकील कहते हैं कि इस मामले पर फैसले की जल्दी क्या है, चुनाव के बाद फैसला दीजिए। श्री प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज तक इस देश की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद को समझ ही नहीं पाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे नेता कभी रामलला के दर्शन करने भी नहीं गए होंगे। मैं इन्हें चुनौती देता हूं कि यहां-वहां बात करने की बजाय अगर इनमें हिम्मत है, तो राम मंदिर का विरोध करके दिखाएं।

*वोट के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है कांग्रेस*

श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब इजराइल पर हमास के आतंकवादियों ने हमला किया, तो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसका विरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन के जरूरतमंद लोगों के लिए राहत सामग्री भी पहुंचाई। लेकिन इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस का स्टैंड वही है, जो केरल की मुस्लिम लीग का है। वहां हमास के नेता ने भाषण दिया, लेकिन कांग्रेस पार्टी मौन है। ये कोई पहली बार नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने कभी सनातन पर हमले का विरोध किया क्या? इंडी गठबंधन के लोग सनातन को एड्स, डेंगू और पता नहीं क्या-क्या कहते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के नेताओं से लेकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी ने इस पर एक शब्द भी नहीं बोला। सनातन के अपमान पर खामोशी और हमास के साथ जुड़ने की कांग्रेस की कोशिश बताती है कि वोट के लिए कांग्रेस पार्टी कितना भी नीचे गिर सकती है। यही वजह है कि जब तीन तलाक विरोधी कानून संसद में लाया गया, तो महिला होते हुए भी न सोनिया जी ने उसका समर्थन किया और न ही ममता जी और मायावती ने किया।


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