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Thursday, July 25, 2024, 2:30 am

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मंत्रिमंडल को लेकर भाजपा नेतृत्व जल्दबाजी में नहीं लेना चाहता निर्णय…

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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान मंत्रिमंडल गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सेनापति गृहमंत्री अमित शाह और उनके सिपहसालार जेपी नड्डाऔर अन्य जल्दबाजी और हड़बड़ी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहते हैं. 2024 के आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए वह हर कदम सोच समझकर रखना चाहते हैं. जिससे किसी भी प्रकार की चूक होने की आशंका न रहे. वह हर एक मुहरे को इस तरह से बिठाना चाहते हैं कि वह विपक्षी महारथियों और वजीरों को भी मात दे सके. 

भारतीय जनता पार्टी यानी टीम मोदी बड़े बड़े महारथी नेताओं का उपयोग करना तो जानती है. अदना से आजना से कार्यकर्ता का भी बड़े से बड़ा उपयोग करना जानती है. तभी तो प्रत्येक चुनाव के पूर्व उनके संगठन की सर्वे रिपोर्ट आ जाती है और उसके अनुसार वह हर एक कार्यकर्ता का पूरा-पूरा उपयोग करते हैं.

यही कारण है कि परिस्थितियों के विपरीत भी अच्छे परिणाम लाकर दिखा देते हैं. जिस भारतीय जनता पार्टी को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में चुनाव तक जीतने की उम्मीद कम थी वहां अप्रत्याशित जीत हुई है. तो यह भाजपा नेतृत्व के टीम मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं के भरपूर उपयोग का नतीजा है. उन्होंने बड़े से बड़े और छोटे से छोटे कार्यकर्ता का उचित जगह पर उचित उपयोग किया. बंपर जीत उसी रणनीति का ही परिणाम है. सोच समझकर निर्णय करने का का एक उदाहरण यह है कि परिणाम आने की आठ दिन बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री 9 दिन बाद मध्य प्रदेश के और 10 दिन बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री का चयन किया गया.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पहले ही तय कर चुका था कि इस बार किस किस राज्य में किस किसको मुख्यमंत्री बनना है और किन-किन को मंत्री. लेकिन फिर भी उसने औपचारिकता और नियम प्रक्रिया का पूरी तरह प्रदर्शन करते हुए यह दर्शाने की की कोशिश की है कि उनके यहां सभी काम नियम अनुसार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होते हैं. भाजपा की इसी रणनीति से कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टी अक्सर अक्सर गच्चा खा जाती है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन सिंह यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राजस्थान मंत्री भजनलाल शर्मा तीनों ही मुख्यमंत्री अपने-अपने मंत्रिमंडल के गठन के लिए मंत्रियों की सूची फाइनल करने दिल्ली केंद्रीय नेतृत्व के तीन-तीन चक्कर लगा चुके हैं. तीनों ही प्रदेश के मंत्रिमंडल के लिए मंत्रियों के नाम लगभग फाइनल हो चुके हैं और जल्द ही मंत्रिमंडल गठित हो जाएंगे. फिर भी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की शपथ के बाद इसमें एक हफ्ते से ज्यादा का समय हो गया है.

शिवराज सिंह : लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं


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