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Wednesday, March 4, 2026, 7:43 pm

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जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: असमय विदाई या भीतरू राजनीति का इशारा?

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा: असमय विदाई या भीतरू राजनीति का इशारा?
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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक पद से इस्तीफा देना भारतीय राजनीति के गलियारों में कई सवाल छोड़ गया है। उन्होंने भले ही स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया हो, लेकिन जिस तरह की गतिविधियाँ उनके इस्तीफे से पहले और बाद में देखी गईं, उससे यह स्पष्‍ट है कि मामला सिर्फ डॉक्टर की सलाह भर नहीं है।

🚨 स्वास्थ्य कारण या राजनैतिक संकेत?

धनखड़ ने जिस दिन इस्तीफा दिया, उस दिन वे न केवल राज्यसभा में सक्रिय दिखे बल्कि आगामी जयपुर यात्रा की भी योजना बनाई गई थी। यदि स्वास्थ्य ही कारण था, तो उनके कार्यालय द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम तय करना सवाल खड़े करता है। क्या यह एक सम्मानजनक तरीके से हटने की रणनीति थी?

CG

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया में केंद्र सरकार धनखड़ के रवैये से असहज हो गई थी। यह भी गौर करने वाली बात है कि उन्होंने जो बैठक बुलाई थी, उसमें भाजपा के कई प्रमुख नेता, जिनमें जे.पी. नड्डा और किरेन रिजिजू शामिल हैं, अनुपस्थित रहे — जो अपने-आप में एक ठंडी नाराज़गी को दर्शाता है।

⚖️ एक संवैधानिक पद की सीमाएं और राजनीतिक दबाव

धनखड़ की राजनीति का सफर कांग्रेस से शुरू होकर भाजपा तक पहुंचा। कानूनी विशेषज्ञता और राजनीतिक वफादारी के चलते उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया, जहाँ ममता बनर्जी सरकार से उनकी लगातार तकरार ने उन्हें पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में बदल दिया।

लेकिन उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर, जहां तटस्थता और गरिमा सर्वोपरि मानी जाती है, वहां धनखड़ की कार्यशैली ने विपक्षी दलों को कई बार असहज किया। कई नेताओं ने उन्हें “पक्षपाती” कहकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए।

उपेक्षा के संकेत और चुप्पी का शोर

जब नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ, तब धनखड़ की अनुपस्थिति एक बड़ा राजनीतिक संकेत मानी गई। यह सवाल उठता है कि देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी को इस ऐतिहासिक अवसर से क्यों दूर रखा गया?

इसके साथ ही, उनकी विदाई के बाद भाजपा की तरफ से आई चुप्पी और कोई औपचारिक प्रतिक्रिया न देना यह दर्शाता है कि शायद पार्टी भी इस फैसले से पहले ही सहमत थी — या शायद यही चाहती थी।


🔍 निष्कर्ष: गरिमा की रक्षा या राजनीतिक प्रबंधन?

धनखड़ का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का स्वास्थ्य-संबंधी निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र में संवैधानिक पदों की बदलती भूमिका और राजनीतिक समीकरणों की पेचीदगियों को उजागर करता है।

क्या यह इस्तीफा खुद को और पद को अपमान से बचाने की कोशिश थी?

जो भी हो, यह घटना भविष्य में संवैधानिक पदों की स्वतंत्रता और गरिमा पर गंभीर विमर्श को जन्म देगी।

 


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