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Wednesday, July 17, 2024, 6:06 pm

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भारतीय रिजर्व बैंक ने माना संचालक मंडल को अपात्र

अपात्र अध्यक्ष पुत्र के द्वारा बैंक के गोपनीय रिकॉर्ड के साथ की गई हेरा फेरी, 3 सदस्यीय जांच कमेटी नियुक्त चिटफंड का मास्टर माइंड प्रोफेशनल डायरेक्टर विनीत बाजपेई ने बैंक को लगाई लाखों की चपत
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संयुक्त पंजीयक सागर ने बना दी 3 सदस्यीय जांच कमेटी, 1 माह के बाद भी जांच अधूरी

बैंक के नियमों के विपरीत अपात्र संचालक मंडल ने की आधा दर्जन फर्जी नियुक्तियां

छतरपुर। सदभाव नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक छतरपुर में अपात्र संचालक मंडल द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया गया। जिसकी लिखित शिकायत संयुक्त पंजीयक सागर से बीते मई माह मे की गई थी। संयुक्त पंजीयक सागर ने सदभाव नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक से संबंधित तमाम प्रकार की शिकायतों को लेकर एक 3 सदस्य टीम गठित की थी। जिसमें इस टीम द्वारा कई प्रकार के भ्रष्टाचार को लेकर 15 दिवस में जांच कंप्लीट कर प्रतिवेदन संयुक्त पंजीयक सागर को भेजना था। सदभाव नागरिक सहकारी बैंक में जो संचालक मंडल है उसे भारतीय रिजर्व बैंक ने अपात्र माना है, और अपात्र संचालक मंडल द्वारा बैंक में आधा दर्जन से अधिक बिना स्वीकृति और बिना विज्ञापन के अलावा बैंक के सारे नियमों को शिथिल करते हुए नियुक्तियां की थी। अध्यक्ष के रिश्तेदार, सगे संबंधी के अलावा मंडल के सदस्यों से सुविधा शुल्क लेकर बैंक में फर्जी नियुक्ति की थी। जिसमें भारी भ्रष्टाचार किया गया था। तमाम भ्रष्टाचार की जांच कमेटी को करनी थी जिसमें 15 दिवस का समय बीत जाने के बाद भी संयुक्त पंजीयक सागर द्वारा 1 सप्ताह का रिमाइंडर जांच कमेटी को भेजा था। 1 माह बीत जाने के बाद भी जांच कमेटी जांच कर प्रतिवेदन सागर नहीं भेज पाई। जिसमें कहीं ना कहीं संयुक्त पंजीयक सागर की सहभागिता उजागर हो रही है।

संयुक्त पंजीयक सागर ने बना दी 3 सदस्यीय जांच कमेटी, 1 माह के बाद भी जांच अधूरीबैंक के नियमों के विपरीत अपात्र संचालक मंडल ने की आधा दर्जन फर्जी नियुक्तियां
संयुक्त पंजीयक सागर ने बना दी 3 सदस्यीय जांच कमेटी, 1 माह के बाद भी जांच अधूरी
बैंक के नियमों के विपरीत अपात्र संचालक मंडल ने की आधा दर्जन फर्जी नियुक्तियां

आरबीआई की रिपोर्ट के बाद भी जे.आर. सागर ने बना दी 3 सदस्यीय जांच कमेटी –

इस पूरे भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए शिकायत के आधार पर जे.आर. सागर ने 31 मई को तीन सदस्यों की जांच कमेठी गठित की और निर्देश दिए कि यह जांच कमेटी संचालक मंडल के पात्र, अपात्र सदस्यों की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। इस जांच कमेटी में तीन सदस्यों को रखा गया। जिसमें एनएस चौहान सहायक आयुक्त सहकारिता छतरपुर, जीतेंद्र यादव सहकारिता निरीक्षक छतरपुर, श्याम क्षत्री सहकारिता निरीक्षक छतरपुर शामिल किए गए। इस जांच कमेटी ने भी लापरवाही वर्ती क्योंकि एक माह पूरा होने के बाद भी प्रतिवेदन जेआर सागर को नहीं सौंपा है। आश्चर्य जनक बात तो यह है कि जब आरबीआई ने सात सदस्यों को अपात्र घोषित कर दिया तो उसके बाद भी जांच कमेटी जांच नहीं कर पाई। जांच दल में श्याम क्षत्री जो वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक हैं उन्हें भी शामिल किया गया है और इनके द्वारा ही वर्ष 2021 में चुनाव अधिकारी रहकर संचालक मंडल व अध्यक्ष के चुनाव कराए गए थे। श्याम क्षत्री ने चुनाव अधिकारी रहते हुए सदस्यों के हस्ताक्षरों का सत्यापन नहीं किया। जिसमें श्याम छत्री के ऊपर लाखों रुपए लेन-देन के आरोप लगाए गए थे, जो कि एक जांच का विषय है।

बैंक में उम्मीदवारों की नियुक्तियों के नियम –

संयुक्त पंजीयक सागर से पद स्वीकृति, दैनिक अखबार में पद स्वीकृति का विज्ञापन का प्रकाशन कराना, 5 लोगों की स्टाफ कमेटी जिसका सदस्य उप पंजीयक होता है, स्टाफ मंडल द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा की लिखित या मौखिक इंटरव्यू लेना है, चयनित उम्मीदवारों की पुष्टि संचालक मंडल द्वारा किया जायेगा इत्यादि।

बैंक के नियमों के विपरीत अपात्र संचालक मंडल ने की फर्जी नियुक्तियां –

सदभाव नागरिक सहकारी मर्यादित बैंक छतरपुर के संचालक मंडल को आरबीआई द्वारा अपात्र घोषित किया गया, लेकिन उसके बावजूद भी संचालक मंडल द्वारा आधा दर्जन फर्जी नियुक्तियां कर दी गईं। जिसमे सहायक लेखपाल पद 2, बैंक रिकवरी पद 1, लिपिक पद 2, सुरक्षा गार्ड पद 1 की नियुक्ति की गई। संचालक मंडल द्वारा की गई फर्जी नियुक्तियों में लाखों रुपए का लेनदेन करने के लग रहे आरोप, जो जांच का विषय है। इन फर्जी नियुक्तियों में संचालक मंडल अध्यक्ष के रिश्तेदार, और परिचितों की नियुक्ति कर किया गया था भ्रष्टाचार। इन फर्जी नियुक्तियों में बैंक द्वारा प्रत्येक माह लगभग 1 लाख रुपए वेतन के रूप में दिया गया। जिन कर्मचारियों की फर्जी नियुक्तियां की गई उन्हें डेढ़ साल तक लगातार वेतन दिया गया इससे बैंक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया और बैंक की आर्थिक स्थिति भी डगमगा गई।
अपात्र संचालक मंडल द्वारा अलग-अलग माह में अलग-अलग लोगों की नियुक्ति की गई थी, जो कि बैंक के नियम के विपरीत है। भारतीय रिजर्व बैंक के ऑब्जेक्शन के बाद अलग-अलग माह में इन लोगों को बैंक से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इन फर्जी नियुक्तियों में बैंक द्वारा प्रत्येक माह लगभग 1 लाख रुपए वेतन के रूप में दिया गया। जो कि लगभग 1 साल तक दिया गया। इन सभी अनियमितताओं की जांच के लिए शासन को एक उच्च स्तरीय जांच दल गठित करना चाहिए ताकि वर्ष 2021 से अब तक किए गए भ्रष्टाचार की पर्त – दर पर्त खुल सके और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों से लेकर संचालक मंडल के सदस्यों के चेहरे भी बेनाकाब हो सकें।


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