Explore

Search

Thursday, February 12, 2026, 2:42 am

Thursday, February 12, 2026, 2:42 am

तेल पाम की खेती: गाँवों के लिए हरियाली से भरी स्थायी आमदनी का रास्ता

तेल पाम की खेती
Share This Post

देश की खेती आज एक ऐसे मोड़ पर है, जहाँ पुरानी पद्धतियों के साथ–साथ नई सोच भी जड़ें जमा रही है। इन्हीं नई संभावनाओं में से एक है तेल पाम की खेती, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत की आय और स्थिरता का आधार बन सकती है।

तेल पाम कोई साधारण फसल नहीं है—एक बार रोपण करने के बाद यह तीसरे साल से फल देना शुरू कर देती है और लगभग 30 साल तक लगातार उत्पादन देती रहती है। इसका मतलब है कि किसान को लंबे समय तक हर साल एक तय और भरोसेमंद आमदनी मिलती रहेगी। आँकड़े बताते हैं कि एक हेक्टेयर में ₹2.5 से ₹3 लाख तक की वार्षिक कमाई संभव है, जो मानसून की मार और मंडी के उतार–चढ़ाव से जूझते इलाक़ों में स्थिरता ला सकती है।

CG

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तेल पाम के तहत देशभर में लाखों हेक्टेयर ज़मीन पर यह खेती शुरू हो चुकी है। छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में तेज़ी से काम किया है—मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में 17 ज़िलों में बंजर ज़मीन अब तेल पाम के बागानों में बदल रही है। यहाँ खेती के साथ–साथ रोज़गार, सिंचाई संरचना और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

सरकार ने इस पहल को सफल बनाने के लिए पूरा सहयोगी ढांचा तैयार किया है—मुफ़्त पौध वितरण, विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन, ₹2 लाख तक की वित्तीय सहायता, और बोरवेल व ड्रिप सिंचाई पर विशेष सब्सिडी। सबसे बड़ी राहत है न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पक्की ख़रीद की गारंटी, जिससे किसान को यह डर नहीं रहता कि उसकी मेहनत का सही दाम नहीं मिलेगा। भुगतान भी सीधे बैंक खाते में किया जाता है, जिससे बिचौलियों का दखल ख़त्म होता है।

तेल पाम का उपयोग सिर्फ़ खाने के तेल तक सीमित नहीं है। इससे बिस्किट, चॉकलेट, साबुन, डिटर्जेंट, और यहाँ तक कि बायोडीज़ल तक बनाए जाते हैं। यही वजह है कि यह फसल भारत की आयातित खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

सफलता का असली आधार सिर्फ़ वित्तीय मदद नहीं, बल्कि सही प्रशिक्षण और जानकारी है। बागवानी विभाग किसानों को मौसम, सिंचाई, पौध संरक्षण और सह–फसल प्रबंधन पर लगातार सलाह दे रहा है, ताकि उत्पादन स्थिर और गुणवत्तापूर्ण रहे।

तेल पाम की खेती इस बात का सबूत है कि अगर किसान को सही फसल, सही तकनीक और पक्के बाज़ार का सहारा मिले, तो खेती सिर्फ़ जीविका का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली संपत्ति बन सकती है। आज लगाया गया पौधा आने वाले दशकों तक गाँव के घरों में खुशहाली का पेड़ बनकर खड़ा रहेगा।


Share This Post

Leave a Comment

advertisement
TECHNOLOGY
Voting Poll
[democracy id="1"]