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Sunday, July 26, 2026, 2:09 pm

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कबाड़ से कर सुधार तक: मध्यप्रदेश की नई दिशा

कबाड़ से कर सुधार तक: मध्यप्रदेश की नई दिशा
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मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में दो फैसले ऐसे लिए गए हैं, जो यह बताते हैं कि राज्य सरकार केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी और लोकतांत्रिक गहराई दोनों पर समान ध्यान देना चाहती है।

प्रदूषण से मुक्ति की पहल

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि जो वाहन मालिक पुराने बीएस-I और बीएस-II वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र में जमा करेंगे, उन्हें “डिपॉजिट सर्टिफिकेट” दिया जाएगा। इस प्रमाणपत्र के आधार पर यदि वे नया वाहन खरीदते हैं तो मोटर टैक्स में आधी छूट मिलेगी। शर्त साफ है कि वाहन की पंजीकरण प्रक्रिया मध्यप्रदेश में ही पूरी हो और प्रमाणपत्र तीन साल के भीतर इस्तेमाल हो।

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यह योजना केवल छूट देने का तंत्र नहीं है, बल्कि प्रदूषण और कबाड़ दोनों से निपटने का तरीका है। राज्य में करीब 99 हजार पुराने वाहन अब भी सड़कों पर हैं। इनसे निकलने वाला धुआं न केवल हवा को दूषित करता है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। सरकार पर भले ही इस योजना से सौ करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय दबाव पड़े, लेकिन प्रदूषण रोकने की कीमत उससे कहीं अधिक है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि इस वित्तीय वर्ष में ही 1,500 से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। यानी लोग बदलाव के लिए तैयार हैं, ज़रूरत सिर्फ सही दिशा दिखाने की है।

नगर नेतृत्व को नया जनादेश

दूसरा बड़ा निर्णय लोकतंत्र से जुड़ा है। नगर परिषद और नगर पंचायत अध्यक्ष अब सीधे जनता द्वारा चुने जाएंगे। 2022 में अपनाई गई अप्रत्यक्ष प्रणाली ने जनप्रतिनिधियों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब दोबारा से जनता का सीधा जनादेश स्थानीय निकायों को मज़बूत करेगा।

प्रत्यक्ष चुनाव से नेतृत्व अधिक जवाबदेह बनता है। आलोचक यह भी कहते हैं कि इससे स्थानीय स्तर पर व्यक्तिवादी राजनीति हावी हो सकती है। लेकिन यह जोखिम उस अपारदर्शिता से छोटा है, जो अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में दिखाई देती है।

साझा संदेश

दोनों निर्णयों का अर्थ स्पष्ट है। पहला कदम हमारी हवा को स्वच्छ बनाने का है और दूसरा हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने का। एक ओर सरकार नागरिकों की सेहत बचाना चाहती है, तो दूसरी ओर उन्हें निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भागीदार बनाना चाहती है।

राज्य की चुनौती यही है कि विकास और पर्यावरण, प्रतिनिधित्व और दक्षता के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए। ताज़ा फैसले दिखाते हैं कि मध्यप्रदेश इस संतुलन की ओर बढ़ने के लिए साहसी कदम उठा रहा है।


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