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Wednesday, February 11, 2026, 11:59 pm

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छत्तीसगढ़: जहां युवा हैं बदलाव की असली ताकत

युवाओं से राष्ट्रनिर्माण: छत्तीसगढ़ का नया अध्याय
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भारत के कई राज्यों में युवा नीति कागज़ पर चमकती है लेकिन ज़मीनी असर खो बैठती है। छत्तीसगढ़ ने इस कमी को अपना अवसर बना लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यहां युवा शक्ति को सिर्फ सुनने का वादा नहीं किया गया, बल्कि उन्हें विकास की कमान थमा दी गई है। राज्य युवा आयोग इस बदलाव का प्रमुख केंद्र है, जो युवाओं को शिक्षा, उद्यमिता, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ एक नई पहचान दे रहा है।

युवा संवाद: विचारों का खुला चौक

ग्रामीण स्कूल से लेकर शहरी कॉलेज तक, ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम ने मंच तैयार किया है जहां छात्र, खिलाड़ी, एनसीसी-एनएसएस सदस्य बिना झिझक अपनी बात रखते हैं। अप्रैल 2025 में बस्तर संभाग के छह ज़िलों में हुआ यह संवाद बताता है कि नीति निर्माण में युवा सिर्फ श्रोता नहीं, सक्रिय सहभागी बन सकते हैं।

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नेतृत्व की प्रयोगशाला

प्रेरणा शिविर यहां नेतृत्व की खेती करते हैं। योग, आउटडोर गतिविधियों और अनुभवी मार्गदर्शन के जरिए अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक सेवा का बीज बोया जाता है। महिला उद्यमियों और ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक मदद से रोज़गार सिर्फ सपना नहीं, हकीकत बन रहा है। ‘युवा गौरव’ और ‘युवा प्रेरणा’ जैसे सम्मान उस मेहनत को सलामी देते हैं जो अक्सर अनदेखी रह जाती है।

डिजिटल कुशलता: समय की नई मुद्रा

आज की दुनिया में इंटरनेट साक्षरता वैसी ही है जैसे पहले पढ़ना-लिखना। आईटी और डिजिटल प्रशिक्षण से छत्तीसगढ़ के युवा न सिर्फ नौकरी के लिए तैयार हो रहे हैं बल्कि डिजिटल इंडिया के बड़े विज़न में अपनी हिस्सेदारी भी निभा रहे हैं। पर्यावरण, स्वच्छता, रक्तदान और जल संरक्षण जैसे अभियानों में उनकी भागीदारी बताती है कि सेवा भावना अब उनकी पहचान का हिस्सा है।

विजन 2047: साझा सपना

देश के विकसित भारत@2047 अभियान के समानांतर, छत्तीसगढ़ का अपना अँजोर विज़न 2047 है। यह किसी फाइल में बंद नारा नहीं, बल्कि युवाओं को सह-निर्माता बनाने का खुला निमंत्रण है। आयोग इस सपने को हकीकत में बदलने का सेतु है।

महिला शक्ति की केंद्रीय भूमिका

मार्च 2025 में अंबिकापुर में स्वच्छता और स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान हुआ। मई में रानी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के मौके पर महिला सशक्तिकरण संवाद आयोजित कर यह साफ संदेश दिया गया कि विकास यात्रा में महिलाएं दर्शक नहीं, चालक हैं।

योग, हरियाली और समावेशी खेल

21 जून को योग दिवस पर योग संगम और हरित योग कार्यक्रम ने स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक साथ जोड़ा। ओलंपिक दिवस पर दृष्टिबाधित बालिकाओं को पैरा ओलंपिक के लिए प्रेरित कर समावेशन को वास्तविक रूप दिया गया।

मॉडल से आंदोलन तक

छत्तीसगढ़ की विशेषता यह है कि यहां संवाद, कौशल, सम्मान, सेवा, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, पर्यावरण और खेल — सबको एक साथ जोड़ा गया है। यह दिखाता है कि सही दिशा और निरंतरता के साथ राज्य केवल नीतियां नहीं, बल्कि आंदोलन भी गढ़ सकते हैं।


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