बस्तर की नई सुबह: बंदूकों के साए से विकास की राह तक
कभी बस्तर का नाम आते ही आंखों के सामने घने जंगलों में लाल झंडे लहराते, गोलियों की आवाज़ और डर से सिहरता माहौल उभर आता था। यह इलाका वर्षों तक वामपंथी उग्रवाद का गढ़ रहा, जहां सरकार की मौजूदगी एक कल्पना जैसी थी और आम लोगों के लिए राज्य सिर्फ एक दूर की परछाईं। लेकिन … Read more