Explore

Search

Friday, March 27, 2026, 2:48 am

Friday, March 27, 2026, 2:48 am

चेरकिन बाई की मुस्कान: मिट्टी से ईंट तक का सफ़र

एक छत की जीत: चेरकिन बाई का नया सवेरा
Share This Post

कोरबा की गहराई में बसा एक छोटा सा गाँव, जहाँ पेड़ों की छाँव तो बहुत है लेकिन पक्की छत किसी सपने से कम नहीं। इसी गाँव में चेरकिन बाई रहती थीं। उम्र ढल चुकी थी, बच्चे नहीं थे, और ज़िंदगी की साथी बस एक जर्जर झोपड़ी थी, जिसकी छत हर बारिश में आसमान को भीतर उतार लाती थी।

बरसों तक उन्होंने यही मान लिया था कि गरीबी ही उनका अंतिम सच है। हर साल कच्ची दीवारों को गोबर-मिट्टी से लीपना, छप्पर पर टाट बिछाना और बारिश में भीगते रहना उनकी नियति बन चुका था।

CG

फिर एक दिन अचानक खबर आई उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में दर्ज हो गया है। शुरू में उन्हें लगा कोई मज़ाक हो रहा है। लेकिन जब पहली किश्त पहुँची और रिश्तेदारों ने हाथ बँटाया, तो उनकी आँखों के सामने धीरे-धीरे एक सपना ईंट और गारे में बदलने लगा।

अब उसी जगह पर, जहाँ कभी भीगती झोपड़ी खड़ी थी, पक्की दीवारें खड़ी हैं। बरसात की रातें अब बेचैनी नहीं लातीं, बल्कि चैन की नींद लाती हैं।

यह कहानी सिर्फ़ एक मकान की नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है जो ग़रीब और सरकार के बीच अक्सर खो जाता है। चेरकिन बाई का घर यह बताता है कि जब योजना सही हाथों तक पहुँचती है, तो वह सिर्फ़ दीवारें नहीं खड़ी करती, बल्कि इंसान का आत्मसम्मान भी लौटाती है।

सच है, यह योजना अभी भी चुनौतियों से घिरी है। कई लोग आज भी पात्र होकर भी छूट जाते हैं। लेकिन यह भी सच है कि चेरकिन बाई जैसी कहानियाँ इन योजनाओं की असली ताक़त हैं।

आज वे कहती हैं “अब मुझे डर नहीं लगता। ये घर मेरे लिए भगवान का तोहफ़ा है।”
और सच यही है कि केरकछार गाँव की इस एक छत के नीचे सिर्फ़ चेरकिन बाई का सिर नहीं, बल्कि उनकी उम्मीदें और उनका गर्व भी सुरक्षित हो गया है।


Share This Post

Leave a Comment