भारत की रेलवे कहानी में एक नया पन्ना जुड़ने वाला है — उमरिया (मध्य प्रदेश) में बन रहा ‘ब्रह्मा’ रेल कोच निर्माण केंद्र। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा शिलान्यास के साथ शुरू हुई यह परियोजना सिर्फ़ एक फैक्ट्री का निर्माण नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विज़न को ठोस आकार देने की दिशा में बड़ा कदम है।
कोच से कहीं आगे की सोच
करीब 60 हेक्टेयर में फैला यह प्लांट भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) द्वारा विकसित किया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में यह हर साल 125–200 कोच तैयार करेगा, लेकिन पाँच साल के भीतर इसकी क्षमता बढ़कर 1,100 कोच तक पहुँच जाएगी। यहाँ तैयार होंगे वंदे भारत, अमृत भारत और मेट्रो ट्रेन के आधुनिक डिब्बे — जो देश के रेल नेटवर्क में नई गति और आराम लाएँगे।
स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा
इस परियोजना से 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे, जो भोपाल, सीहोर, विदिशा, मंडीदीप और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधि को गति देंगे। इसके साथ ही, तकनीकी शिक्षा संस्थानों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए यह एक लाइव इंडस्ट्री लैब की तरह काम करेगा, जहाँ नई पीढ़ी को अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मेक इन इंडिया के तहत एक अहम मील का पत्थर बताया है। यहाँ प्रयुक्त अधिकांश तकनीक और सामग्री देश में ही तैयार होगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी और भारत के औद्योगिक आत्मविश्वास को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक मॉडल
इस संयंत्र का डिज़ाइन ग्रीन इंडस्ट्री के मानकों पर आधारित है — जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम, सौर ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण-अनुकूल लैंडस्केपिंग इसके संचालन का हिस्सा होंगे।
वैश्विक अवसरों का द्वार
इस कारखाने का महत्व केवल घरेलू मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है। भविष्य में यह भारत को वैश्विक हाई-स्पीड रेल और मेट्रो कोच सप्लाई चेन का हिस्सा बना सकता है, जिससे निर्यात और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
भविष्य की नींव
‘ब्रह्मा’ का निर्माण इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और औद्योगिक दृष्टि साथ हों, तो किसी भी राज्य को राष्ट्रीय औद्योगिक केंद्र में बदला जा सकता है।
Author: This news is edited by: Abhishek Verma, (Editor, CANON TIMES)
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